ा दारोमदार
टिम विकरे
बीबीसी स्पोर्ट्स
12 जून 2014 अतिम अपडेट 17:47 IST पर
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रियो में मेरे फ्लैट के सामने वाली सड़क पर एक
सुपरमार्केट है. जिसके गेट पर मौजूद कर्माचारी पीले
रंग की टीशर्ट में नजर आता है, ब्राज़ीली फ़ुटबॉल
टीम की जर्सी का रंग भी यही है.
इसमें अचरज वाली कोई बात नहीं है. ब्राज़ील में
वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के दौरान हर कोई फ़ुटबॉल के रंग में
डूब नजर आता है. इस सुपरमार्केट में ढेरों टीशर्ट बिक
रहे हैं, जिनके पीछे 10 नंबर अंकित है और नाम
लिखा है नेमार जूनियर.
दरअसल नेमार जूनियर पर ब्राज़ील को इस बार वर्ल्ड
कप चैंपियन दिलाने का दारोमदार है. महज 22 साल
की उम्र के नेमार के कंधों पर बड़ा दारोमदार है.
ऐसे में अगले कुछ सप्ताह के बाद लोग
उनकी जर्सी को या तो संभाल कर रखेंगे या फिर
आक्रोशित फ़ैंस जर्सीको जलाते हुए नजर आएंगे.
नेमार का सफ़र
बीते साढ़े चार सालों से नेमार ब्राज़ीली फ़ुटबॉल
के राजकुमार के तौर पर उभरे हैं. अगर ब्राज़ील को वे
छठी बार वर्ल्ड कप का ख़िताब दिलाने में
कामयाब होते हैं तो वे ब्राज़ीली फ़ुटबॉल
की दुनिया के किंग हो जाएंगे. हालांकि अगर वे
ऐसा करिश्मा नहीं दिखाते हैं,
उनकी आलोचना भी ख़ूब होगी.
नेमार के अनुबंध संबंधित कामकाज को उनके
पिता ही देखते हैं. उन्हें इस हालत की आशंका थोड़े
समय पहले ही हो गई थी. तब नेमार सैंटोस क्लब
की ओर से खेलते थे. उनका करार 2014 तक का था,
लेकिन उन्होंने एक साल पहले
ही बार्सिलोना का दामन थाम लिया.
तब उनके पिता ने कहा था कि कंफेडरेशंस कप से पहले
इस अनुबंध का होना अच्छा था. क्योंकि उन्हें
आशंका थी कि कंफेडरेशंस कप के दौरान नेमार अगर
फ्लॉप हुए तो क्या होगा.
लेकिन नेमार फ्लॉप नहीं हुए. उन्होंने पहले ही मैच के
शुरुआती मिनट में शानदार गोल ठोका और उसके बाद
पीछे मुड़कर नहीं देखा.
वैसे कंफेडरेशंस कप और वर्ल्ड कप में बहुत अंतर होता है.
वर्ल्ड कप का दबाव कहीं ज़्यादा होता है.
10 नंबरी नेमार
लेकिन नेमार चुनौती के लिए तैयार हैं. उन्होंने
शब्दों में नहीं, बल्कि नंबरों में यह दर्शा जरूर
दिया है.
वे अपने देश के लिए हमेशा 11 नंबर की जर्सी में खेलते
थे. लेकिन महज एक साल पहले उन्होंने इंग्लैंड के
ख़िलाफ़ एक दोस्ताना मैच में 10 नंबर
की जर्सी पहनी.
ऐसा करके वे ख़ुद को पेले और ज़ीको की श्रेणी में ले
आए. उन्होंने ख़ुद को और अपने टीम के
साथियों को ये भरोसा दिया है कि वे हर
चुनौती को संभाल सकते हैं.
कुछ लोगों ने बार्सिलोना के साथ उनके पहले सीजन
को लेकर संदेह जताया था. ख़ुद पेले ने
भी कहा था कि उनके युवा कंधों पर
काफ़ी ज़्यादा दबाव होगा.
ब्राज़ील के कोच लुईस फिलीप स्कोलारी की सोच
ऐसी नहीं रही. इसकी अपनी वजहें भी हैं.
क्योंकि नेमार जब ब्राज़ील से खेलते हैं तो वे
अपनी टीम के स्टार होते हैं. बार्सिलोना की टीम
की तरह लियोनेल मेसी के सहयोगी खिलाड़ी भर
नहीं.
स्कोलारी नेमार को सेंटर फॉरवर्ड की तरह इस्तेमाल
करते हैं. बार्सिलोना की टीम में नेमार इस
भूमिका में नहीं खेलते.
नेमार की ख़ासियत यह है कि वे जब अपनी लय में
हो तो फिर उन पर काबू पाना आसान नहीं. वे
गिफ्टेड स्पोर्ट्समैन नजर आते हैं.
नेमार भी पूरी तरह तैयार
नेमार जब मैदान में गेंद के साथ भागते हैं, उनके बारे में
अनुमान लगाना आसान नहीं होता. वे तेजी से
भागते हैं, संतुलन के साथ भी भाग सकते हैं और उनके
दोनों पांवों की चपलता देखने लायक होती है.
यही वजह है कि 2009 के अंत में उन्होंने ब्राज़ील के
फर्स्ट डिविजन फ़ुटबॉल में अपनी पुख़्ता पहचान
बना ली. नाइजीरिया में हुई वर्ल्ड कप अंडर-17 में वे
ब्राज़ीली टीम के बड़े स्टार में शामिल थे. लेकिन
उनकी मौजूदगी में भी टीम ग्रुप राउंड से बाहर
हो गई.
नेमार के लिए वह दौर अच्छा नहीं था. जब ब्राज़ील
को गोल की सख़्त जरूरत थी, वे असर नहीं डाल पाए.
हालांकि अब नेमार उन यादों से काफी आगे निकल
आए हैं. ब्राज़ीली टीम को भरोसा है कि नेमार अब
कहीं ज्यादा मैच्योर खिलाड़ी हैं. बार्सिलोना के
साथ खेलकर नेमार ने जो अनुभव हासिल
किया वो भी टीम के काम आएगा.
ब्राज़ील के बेहद मशहूर शारीरिक फिटनेस के एक्सपर्ट
पाउलो पैक्साओ के मुताबिक इस वर्ल्ड कप में
शानदार स्थिति में हैं. उन्होंने कहा, "मुझे
पूरा भरोसा है कि नेमार इस वर्ल्ड कप में अपनी चमक
बिखेरेंगे."
ज़ाहिर है कि ब्राज़ील को घरेलू दर्शकों के सामने
चैंपियन बनाने और वर्ल्ड कप का ख़िताब छठी बार
दिलाने का दारोमदार युवा नेमार के कंधों पर
ही टिका है.
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Posted via Blogaway

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